



Our History
वृंदावन के हृदय में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर हरिदासिया सम्प्रदाय पर आधारित है।
लगभग 250 वर्ष पूर्व, स्वामी श्री हरिदास जी की दसवीं पीढ़ी के आचार्य
श्री सनेहीलाल गोस्वामी जी महाराज ने इसकी स्थापना की थी।
श्री बांके बिहारी जी की सेवा के दौरान, गोस्वामी जी को स्वप्न में ठाकुर जी का आदेश मिला —
“मेरी गौशाला में एक पवित्र स्थान खोजो, जहाँ मेरा साक्षात स्वरूप विद्यमान है।”
अगली सुबह, उन्हें वही दिव्य श्री विग्रह प्राप्त हुआ,
जिसे आज श्री राधा सनेह बिहारी जी महाराज के नाम से पूजा जाता है।
तब से यह मंदिर भक्ति, प्रेम और स्नेह का अद्भुत प्रतीक बना हुआ है।
“यहाँ हर कण में ठाकुर जी की कृपा और सनेह का अनुभव होता है।”
Our Story
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सेवा के एक दिन, उनके मन में एक दिव्य भावना जागृत हुई —
“काश ठाकुर जी मुझे अपने समान एक रूप का दर्शन कराएं,
जिसकी सेवा और आराधना मैं स्वयं कर सकूँ।”
उसी रात, श्री बांके बिहारी जी स्वप्न में प्रकट हुए और उन्होंने कहा —
“हे सनेहीलाल, मेरी गौशाला में एक विशिष्ट स्थान खोजो —
जहाँ एक गहरे वर्ण की गाय के नीचे पवित्र भूमि पर मेरा साक्षात स्वरूप विद्यमान है।”
अगली ही सुबह, श्री सनेहीलाल गोस्वामी जी उस स्थान पर पहुँचे,
और आश्चर्यचकित रह गए —
वहाँ मिट्टी के भीतर से उन्हें एक अत्यंत सुंदर दिव्य विग्रह प्राप्त हुआ,
जो स्वयं श्री बांके बिहारी जी के समान था।
इस दिव्य विग्रह को नाम दिया गया —
“श्री राधा सनेह बिहारी जी महाराज”।
इस मंदिर का नवनिर्माण पूज्य आचार्य स्वर्गीय श्री अतुलकृष्ण गोस्वामी जी के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें श्री विपुलकृष्ण गोस्वामी जी का भी विशिष्ट सहयोग रहा। मंदिर का स्थापत्य प्राचीन भारतीय विरासत और आधुनिक वास्तुकला का अद्वितीय संगम है — जो भक्तों को एक साथ संस्कार, शांति और सौंदर्य का अनुभव कराता है।
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यदि आप वृंदावन आने की योजना बना रहे हैं, तो ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी के दर्शन अवश्य करें और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण और सार्थक बनाएं।