बालभोग एवं माखन–मिश्री सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी के बाल स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत मधुर और स्नेहपूर्ण सेवा है।
इस सेवा के माध्यम से भक्त ठाकुर जी को माखन, मिश्री, दूध, फल और बाल्यकाल के प्रिय व्यंजन अर्पित करते हैं। यह सेवा बाल गोपाल के प्रति मातृभाव, वात्सल्य और प्रेम की अभिव्यक्ति है — जहाँ भक्त ठाकुर जी को अपने बच्चे के रूप में पूजता और स्नेह से सेवा करता है। माखन–मिश्री का यह अर्पण भक्ति के सबसे कोमल और सरल रूपों में से एक है।
बाल स्वरूप में ठाकुर जी की सेवा करने से भक्त के जीवन में सरलता, निष्कपटता और आनंद का वास होता है। यह सेवा हमें यह सिखाती है कि भगवान तक पहुँचने के लिए जटिल मार्ग नहीं, बल्कि बाल–भाव ही पर्याप्त है। माखन–मिश्री ठाकुर जी की प्रिय वस्तुएँ हैं — जो शुद्धता और स्नेह का प्रतीक हैं।
जो भक्त ठाकुर जी को माखन–मिश्री अर्पित करता है, उसके जीवन से मिठास कभी कम नहीं होती।
माखन–मिश्री ठाकुर जी की नहीं, भक्त की भक्ति की मिठास है। जब प्रेम बाल–भाव में ढलता है, तब ठाकुर जी स्वयं माखन चुराने आते हैं।
विशेष अवसरों (जैसे बच्चों के जन्मदिन या परिवारिक मांगलिक कार्यक्रमों) पर यह सेवा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।