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स्वर्ण–रजत शृंगार सेवा

स्वर्ण–रजत शृंगार सेवा

सेवा का परिचय

स्वर्ण–रजत शृंगार सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की सबसे अलौकिक और वैभवशाली सेवाओं में से एक है। इस सेवा में भक्त ठाकुर जी को स्वर्ण (सोने) या रजत (चाँदी) निर्मित आभूषण, मुकुट, कंगन, पायल, बांसुरी या अन्य अलंकरण अर्पित करते हैं। 

यह सेवा भक्ति में प्रेम और श्रद्धा का उच्चतम प्रतीक है — जहाँ भक्त ठाकुर जी को अपने सर्वोत्तम भावों और संपन्नता के साथ सजाता है।

शृंगार का यह रूप न केवल सौंदर्य का, बल्कि आत्मा के स्वर्ण भाव का प्रतीक है, जो भक्त को ठाकुर जी के दिव्य स्वरूप से जोड़ देता है।

सेवा का महत्व

स्वर्ण और रजत अर्पण केवल भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि भक्त के त्याग और समर्पण की अभिव्यक्ति है। यह सेवा भक्त को यह भाव देती है कि जो कुछ भी मेरे पास है, वह ठाकुर जी की कृपा से ही है, और अब मैं उसी को उनके चरणों में समर्पित करता हूँ। इस सेवा से ठाकुर जी का दिव्य विग्रह नवल-नवीन आभा से आलोकित होता है।

स्वर्ण का तेज और रजत की शीतलता, जब ठाकुर जी के चरणों से मिलती है, तब भक्त का जीवन भी रत्नों-सा पवित्र हो जाता है।

अर्पण के प्रकार

  • स्वर्ण आभूषण अर्पण: मुकुट, कंठहार, कंगन, बांसुरी आदि।
  • रजत अलंकरण: पायल, करधनी, चँवर, मुकुट आधार आदि।
  • मिश्रित शृंगार: स्वर्ण और रजत के संयुक्त अलंकरण का अर्पण।
  • विशेष अवसर शृंगार: जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और अन्य पर्वों पर विशेष आभूषण सेवा।

सेवा प्रक्रिया

  1. भक्त मंदिर या वेबसाइट के माध्यम से सेवा आरक्षित करें।
  2. मंदिर प्रबंधन सेवा की तिथि और अर्पण सामग्री की पुष्टि करेगा।
  3. आभूषण या अलंकरण मंदिर द्वारा निर्मित अथवा भक्त द्वारा समर्पित हो सकते हैं।
  4. सेवा दिवस पर ठाकुर जी को स्वर्ण/रजत अलंकरणों से सजाया जाएगा।
  5. सेवा के उपरांत पुष्टिकरण संदेश और फोटो भक्त को भेजे जाएंगे।

नियम एवं दिशा–निर्देश

  • सभी अर्पित वस्तुएँ नवीन और मंदिर की परंपरा के अनुरूप हों।
  • यदि भक्त स्वयं आभूषण भेजना चाहते हैं, तो उसका विवरण मंदिर प्रबंधन को अग्रिम देना आवश्यक है।
  • अर्पित वस्तुएँ मंदिर की संपत्ति मानी जाएँगी, जिन्हें विशेष अवसरों पर पुनः उपयोग किया जा सकेगा।
  • स्वर्ण अर्पण हेतु प्रमाणिकता और मंदिर स्वीकृति आवश्यक होगी।

सेवा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण

  • भक्त का नाम
  • गोत्र
  • नक्षत्र / जन्म राशि (यदि उपलब्ध हो)
  • सेवा किसके नाम से करवाई जा रही है
  • विशेष अवसर (जन्मदिन, वर्षगाँठ, पुण्यतिथि आदि)
  • निवास स्थान
  • ईमेल व मोबाइल नंबर
  • तिथि और शृंगार प्रकार

आध्यात्मिक संदेश

स्वर्ण का तेज जब सनेह के भाव से जुड़ता है, तब वह आभूषण नहीं, ठाकुर जी के चरणों में चढ़ा हुआ प्रेम बन जाता है।


हमारे पंडित जी से संपर्क कैसे करें?

भक्त चाहें तो अपने परिवार या पूर्वजों के नाम से विशेष शृंगार सेवा करा सकते हैं। इस सेवा के अंतर्गत मंदिर प्रबंधन द्वारा भक्त को पूर्ण विवरण और रसीद उपलब्ध कराई जाएगी।

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