स्वर्ण–रजत शृंगार सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की सबसे अलौकिक और वैभवशाली सेवाओं में से एक है। इस सेवा में भक्त ठाकुर जी को स्वर्ण (सोने) या रजत (चाँदी) निर्मित आभूषण, मुकुट, कंगन, पायल, बांसुरी या अन्य अलंकरण अर्पित करते हैं।
यह सेवा भक्ति में प्रेम और श्रद्धा का उच्चतम प्रतीक है — जहाँ भक्त ठाकुर जी को अपने सर्वोत्तम भावों और संपन्नता के साथ सजाता है।
शृंगार का यह रूप न केवल सौंदर्य का, बल्कि आत्मा के स्वर्ण भाव का प्रतीक है, जो भक्त को ठाकुर जी के दिव्य स्वरूप से जोड़ देता है।
स्वर्ण और रजत अर्पण केवल भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि भक्त के त्याग और समर्पण की अभिव्यक्ति है। यह सेवा भक्त को यह भाव देती है कि जो कुछ भी मेरे पास है, वह ठाकुर जी की कृपा से ही है, और अब मैं उसी को उनके चरणों में समर्पित करता हूँ। इस सेवा से ठाकुर जी का दिव्य विग्रह नवल-नवीन आभा से आलोकित होता है।
स्वर्ण का तेज और रजत की शीतलता, जब ठाकुर जी के चरणों से मिलती है, तब भक्त का जीवन भी रत्नों-सा पवित्र हो जाता है।
स्वर्ण का तेज जब सनेह के भाव से जुड़ता है, तब वह आभूषण नहीं, ठाकुर जी के चरणों में चढ़ा हुआ प्रेम बन जाता है।
भक्त चाहें तो अपने परिवार या पूर्वजों के नाम से विशेष शृंगार सेवा करा सकते हैं। इस सेवा के अंतर्गत मंदिर प्रबंधन द्वारा भक्त को पूर्ण विवरण और रसीद उपलब्ध कराई जाएगी।